ए.ओ.त्रिवेदी हाय-हाय,ए.ओ.त्रिवेदी हाय-हाय,आखिर क्योँ लगाए गांव वालों ने सरीगाँव जीपीसीबी के बाहर हाय-हाय के नारे?
हमेशा से सुर्खियों में रहने वाली सरीगांव जीआईडीसी और जीपीसीबी एक बार फिरसे विवाद में….

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उमरगांव तालुका के सरीगांव जीआईडीसी के नजदीक करजगाँव नामक एक गांव के बोरिंग से अचानक लाल पानी निकलने की वजह से वहाँ के लोगो में भय का माहौल छा गया,यह लाल पानी आया कहाँ से?
अब बात करते है विस्तार से तो यह कोई नई बात नही है कि सरीगांव जीआईडीसी के नजदीक वाले गांवो में पहली बार हुवा है,ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है,जैसे की नहरों में केमिकल छोड़ने की वजह से मछलियो को नुकसान होना, नहरों में रंग-बिरंगी पानी का देखा जाना.
करजगाँव में बोरिंग से लाल-पानी निकलना यह तो सरीगांव जीआईडीसी की कुछ कंपनियों की ही महेरबानी होगी.पर मुद्दे की बात तो यह है कि जीपीसीबी के अधिकारी ऐसे मामलों में चुप क्यों है?
अब बात करते है जीपीसीबी के अधिकारी अश्विनीकुमार त्रिवेदी जी की तो अगर उनके साथ किसी मसले पर किसी आम इंसान को बात करना हो तो वह खुद को मीटिंग में बोल कर बात को टाल देते है और बहोत ही कड़क स्वभाव रखने वाले त्रिवेदी साहब ने तो सेक्युरिटी पर मोबाइल जमा करवाने का नया कानून बना दिया है,चाहे वह आम इंसान हो या पत्रकार सभी के मोबाइल फ़ोन सेक्युरिटी पर जमा करवा लिया जाता है,ऐसा तो जीपीसीबी में क्या कामकाज होता है कि पत्रकार का मोबाइल फ़ोन भी जमा कर लिया जाता है.
अभी कुछ दिनों पहले ही उमरगांव जीआईडीसी की एक कंपनी में ब्लास्ट होने के कारण उसके बगल की कंपनी भी जलकर राख हो गई थी,अब तक तो उस पर कोई कारवाई हुई नही और लाल पानी निकलने की नई समस्या खड़ी हो चुकी है.
सरीगांव इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रेसिडेंट कमलेश भट्ट ने भी लाल पानी वाली समस्या पर अब तक चुप्पी साधी है.कमलेश भट्ट और त्रिवेदी साहब अब आगे क्या एक्शन लेंगे यह तो वक़्त ही बताएगा,या फिर सेटिंग डॉट कॉम का नाम तो आपने सुना ही होगा.
करजगाँव के लोगो ने तो जीपीसीबी के बाहर पूर्व.सरपंच कमलेशभाई एवं एडवोकेट मितेश पटेल के साथ मिलकर जीपीसीबी के बाहर जोरदार धरना भी किया और हाय-हाय के नारे भी लगाए,अब आगे देखते है कि इस लाल पानी की समस्या पर क्या कार्रवाई की जाती है या नही?

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