गुजरात पुलिस के 50 हजार से ज्यादा जवानों ने अंगदान का लिया संकल्प:पुलिस के मानवीय पक्ष और पावन संकल्प से जनता हुई अभिभूत

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वलसाड पुलिस के 1400 जवानों ने देहदान की खाई कसम

देव आनंद महानामा

वापी: अभी तक पुलिस का कठोर पक्ष सभी देखते आए हैं डंडे बरसाती पुलिस, लोगों को पीटती पुलिस, लोगों को परेशान करती पुलिस, पैसे खाती पुलिस . कहते हैं कि पुलिस के इस कठोर रवैए की वजह से समाज में उनकी इमेज काफ़ी नकारात्मक बन गई है , शरीफ लोग पुलिस के पास जाने से घबराते हैं. इस वजह से बदमाशो के हौसले बुलंद रहते है.
इस तरह की बातों से पुलिस का मनोबल टूटता है और वो और आक्रामक हो जाती हैं क्योंकि आप उसकी इज्ज़त नही करते.
पुलिस भी उतनी ही इज्ज़त की हकदार है जितने की आप हैं. पुलिस के कठोर रवैए की तो सभी आलोचना करते हैं मगर उनके मानवीय पक्ष को कोई उजागर नहीं करता.
पुलिस दिन रात लोगों की सेवा में लगी रहती हैं, उनको आमतौर पर छुट्टियां नहीं मिलती, परिवार के साथ उनको रहने का ज्यादा मौका नहीं मिलता. सर्दी, गर्मी, बारिश में वो अपने कर्तव्य का निर्वाह करती है उसे भी आराम, सराहना और इज्जत की जरूरत है. चंद पुलिस के भ्रष्ट होने की वजह से सभी को ब्लेम करना ठीक नहीं है. पुलिस भी आखिर इंसान है उसे भी प्यार और सम्मान की जरूरत है.
जब पुलिस से गलती हो जाती है तो सभी उसकी आलोचना करने लग जाते हैं मगर जब पुलिस अच्छा काम करती है तो लोगों के मुंह सिल जाते हैं, इस परम्परा को रोकना पड़ेगा.
पुलिस के मानवीय पक्ष को जनता के समक्ष जितना लाया जाएगा पुलिस के प्रति लोगो का भय कम होते जायेगा.
पुलिस के अच्छे कामों की सराहना जरूर होनी चाहिए तभी लोग पुलिस को इको फ्रेंडली समझेंगे.
बीते दिन गुजरात पुलिस ने जबर्दस्त सराहनीय कार्य किया. गुजरात पुलिस के 50 हजार से ज्यादा जवानों ने अंगदान का संकल्प लिया. इस मौके पर वलसाड जिले के करीबन 1400 जवानों ने देहदान की कसम खाई. पुलिस की इस शानदार पहल की अखबारों में ज्यादा चर्चा नहीं हुई ये अफसोस की बात है. इस बात को ज्यादा चर्च मिलनी चाहिए थी. अखबारों में इस खबर को ज्यादा स्पेस मिलना चाहिए था मगर ऐसा न हो सका.
बीते रविवार को गुजरात के मुख्य मंत्री भूपेंद्र सिंह ने अहमदाबाद स्थित GMERS हॉस्पिटल से सभी को वर्चुअल संबोधित किया . इस संबोधन का उद्देश्य CPR ट्रेनिंग प्रोग्राम को ज्यादा से ज्यादा सफल बनाना था. पाठकों को थोड़ा CPR प्रोग्राम के बारे में भी बता दूं ताकि उन्हें समाचार समझने में आसानी हो सके.
इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थेसियोलोजिस्ट की गुजरात इकाई ने बीते रविवार को गुजरात के पूरे मेडिकल कॉलेजों में CPR ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया . इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए लोगों को दुर्घटना में घायल व्यक्ति का जीवन बचाने की जानकारी दी जाती है. ये जानकारी सभी को लेनी चाहिए. जब तक एंबुलेंस न आ जाए तब तक जो किया जा सकता है वो जानकारी अगर लोगों को होगी तो वो घायलों की जान बचाने में अपने को काफ़ी कंफरटेबल महसूस करेंगे. इससे कईयों की जान बच सकेगी.
इसी क्रम में वलसाड मेडिकल सिविल हॉस्पिटल के कैम्पस में स्थित GMIRS मेडिकल कॉलेज में पुलिस कर्मियों के लिए CPR ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया.इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य के वित्त मंत्री कनु देसाई ने की. इस मौके पर कनु देसाई ने कहा कि वलसाड जिला पुलिस न केवल नागरिकों की सुरक्षा कर रही है बल्कि वो अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही है. कोरोना काल में पुलिस ने बेहतर काम किया है. उन्होनें आगे कहा कि रास्ते पर मौजूद पुलिस दुर्घटना होने पर अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस के न पहुंचने तक घायल का जीवन बचाने को प्राथमिकता देती है.
इस प्रोग्राम को वलसाड के पुलिस अधीक्षक डॉ. राजदीप सिंह झाला ने भी संबोधित किया. उन्होंने कहा यह CPR ट्रेनिंग प्रोग्राम कई कीर्तिमान स्थापित करेगा. उन्होनें कहा कि दुर्घटना होने पर सबसे पहले पुलिस पहुंचती है. पुलिस की जिम्मेदारी गुनाह का पर्दाफाश करने तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के लिए उपयोगी होना भी है. इस ट्रेनिंग के बाद घायलों को बचाने में पुलिस और भी सामर्थवान होगी . उन्होनें कहा इस कार्यक्रम से जुड़कर हम अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.
इस मौके पर पुलिस अधीक्षक ने अंगदान के महत्व को भी समझाया. उन्होनें कहा मृत्यु के बाद अगर आप किसी के काम आते हैं तो बहुत पुनीत कर्म हैं.
इस कार्यक्रम में धरमपुर के विधायक अरविंद पटेल, कपराड़ा के विधायक जीतू चौधरी, कलगाम स्थित एसआरपी ग्रुप कमांडेट विजय सिंह गुर्जर और सिविल अस्पताल के सर्जन डा. भावेश गोयानी समेत ढेर सारे पुलिस कर्मी और स्वास्थ्य कर्मचारी उपस्थित थे.
अगले अंक में हम पाठकों को अंगदान का महत्व विस्तार से बताएंगे.

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