सरिगॉव के केमिकल कौभांडी विधायक की शरण मे आते विधायक ने पत्रकारों पर उठाई ऊँगली,तो क्या अब केमिकल का काला कारोबार ओर गति से बढ़ेगा..?

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तपोवन, संजान : सरिगॉव के केमिकल कौभांडी विधायक रमनभाई पाटकर की शरण में आते ही विधायक ने पत्रकारिता पर सवाल उठाया है और सरिगॉव से चल रहे केमिकल के काले कारोबार को और ज्यादा गति मिले ऐसा प्रयास किया जा रहा है।
तो अब राजकारणी नेता जो वसूली करते है वह पार्टी फण्ड है या खुदकी जेबे भरने की नीतियां..?
सरिगॉव एस.आई.ए की ऑफिस पर सीसीटीवी की व्यवस्था का लोकार्पण करने के लिये सूरत रेंज के आईजी राजकुमार जी और जिला पुलिस मुखीया झाला जी उपस्थिति रहे थे,सरिगॉव में एक ओर सावधानी भरी पहल करने वाला यह सराहनीय कदम प्रशंशा के पात्र है।
ऐसे अच्छे कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों के सामने केमिकल माफियाओं की तरफदारी करने के लिए विधायक रमन पाटकर ने पत्रकारो पर उंगली उठाई,जो कि यह निंदा के पात्र है।
काले काम करने वाले पत्रकारो पर उंगली उठाकर विधायक रमन पाटकर ने सरिगॉव के केमिकल माफियाओं को बचाने का जिस तरह प्रयास किया है वह चर्चा का विषय बन चुका है।
माना जा सकता है कि कुछ गलत लोग मीडिया को बदनाम कर रहे है,तो ऐसे लोगो पर क्यों पुलिस फरियाद दायर नही की जाती? यह भी सोचने वाली बात है,इसका कारण यह भी हो सकता है कि रात के अंधेरे में केमिकल का काला कारोबार जोरो में चल रहा है।
सरिगॉव में आनेवाले केमिकल और कंपनियों से निकलते जोखम से भरे घन कचरे की हेराफेरी की चर्चा विधायक रमन पाटकर के कानों से दूर नही है।
चर्चा यह भी है कि कुछ राजकीय नेता भी केमिकल हेराफेरी के कौभांड में हिस्सेदार है।
सरिगॉव के केमिकल और कंपनियों से निकलते घन कचरे या पॉल्युशन के कौभांड का खुलासा पत्रकार द्वारा नही किया जाये इसलिये केमिकल माफियाओं ने विधायक रमन पाटकर को इस बारे में बात की है ऐसी चर्चा चल रही है।
हाल ही में हेराफेरी करते कुछ केमिकल टेंकर पकड़े जाने की बात सामने आई थी,तब ऐसे कंपनी संचालक और नेता चुप क्यों थे इस बात का खुलासा करना बहोत जरूरी है।
अब पत्रकारो पर उंगली उठाने वाले नेताओ को भी यह जानना जरूरी है की माहिती खाता जो कि सरकारी तंत्र का ही एक हिस्सा है,वहाँ पर पत्रकारों की सूची की जांच करनी चाहिए और जिन पत्रकारो द्वारा कंपनियों के संचालको को डराया जा रहा है,उन कंपनी के संचालकों को पुलिस चौकी में शिकायत करनी चाहिए,परंतु काले कारोबारी खुदके व्यवसाय को बचाने के लिए राजकारणीयो की शरण मे गए है इसमें कोई नई बात नही है।

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