वापी नगरपालिका से सावधान, यहाँ खुलेआम चल रही है पैसो की लूंट..?

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तपोवन,संजान।अगर आपको वापी नगरपालिका में कुछ काम करवाना है तो हो जाइए सावधान,यहाँ खुलेआम चल रही है पैसो की लूंट..?
कुछ दिनों पहले वापी नगरपालिका में दि.21-01-2022 को RTI मांगी गई,इसके जवाब में नगरपालिका द्वारा उन्हें दि.11-02-2022 के दिन दोपहर 12:00 बजे रेकॉर्ड चेक करने को बुलाया गया और नकल के पैसे भरने को कहा गया की आप को नकल की रकम भरने को पत्र द्वारा सूचित किया जायेगा ।दी 17.02.2021के पत्र से नकल की रकम रुपये 2130 बताई गई।
दि.24-02-2022 के दिन जब आवेदनकर्ता पैसे भरने को गए तब वहाँ 1 नकल के 6 रुपये की वसूली देखकर उनके होश उड़ गए ओर उन्होंने तात्कालिक नगरपालिका के चीफ अफसर शैलेश पटेल को फ़ोन लगाया और चीफ अफसर से इस बारे में बात की तब चीफ अफसर ने माना कि 2 रूपये के हिसाब से पैसे भरने होते है।
उसके बाद आवेदनकर्ता ने नगरपालिका को एक आवेदन पत्र लिखकर दिया और उसमें उल्लेख किया कि रितेशभाई वालंद उन्हें रुपये 6 एक नकल का भरने को कह रहे है जबकि RTI कानून के मुताबिक 2 रुपये एक नकल के होते है,जिस हिसाब से मुजे रुपये 710 भरने है,पर रितेशभाई वालंद द्वारा उन्हें कहा गया कि आपको जहा जाना है वहाँ जाओ हमारे यहाँ तो पूरे 2130 रुपये भरने होंगे तब ही आपको माहिती की नकल दी जाएगी,उस आवेदन पत्र में आवेदनकर्ता ने साफ शब्दों में लिख दिया कि RTI कानून के मुताबिक में रकम भरने को तात्पर्य हु।
उसके बाद आवेदनकर्ता वहाँ से चले गए,ओर तात्कालिक चीफ अफसर द्वारा रितेशभाई वालंद को आदेश दिया गया कि 2 रुपये एक नकल लीजिए,ठीक 2 दिन बाद आवेदनकर्ता को रितेशभाई वालंद का फ़ोन आया और कहा गया कि 2 रुपये के हिसाब से आप पैसे भरकर माहिती की नकल ले जाइए।दी 03-03-2022 को आवेदनकर्ता ने 398 नकल की कॉपी के 796 रुपये भरकर माहिती की नकल प्राप्त की।
सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) 2005 के मुताबिक भारत सरकार द्वारा एक कानून पास किया गया,जिसमे भ्रष्टाचार के खिलाफ आप को सूचना का अधिकार है,यह नियम 2005 से लागू हुआ.RTI भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बनाया गया कानून है और सामान्य नागरिक को भी RTI के तहत जानने का अधिकार है की हमारे सरकारी दफ्तरों में क्या चल रहा है।
पर वापी नगरपालिका में तो उल्टा काम ही चल रहा है,भ्रष्टाचार को रोकने के लिए यह अधिनियम बनाया गया और इस अधिनियम की आड़ में ही पैसे की वसूली की जा रही है।
अब सोचने वाली बात तो यह है कि भ्रष्टाचार को रोकने के लिए की गई RTI पर जब वापी नगरपालिका पैसे लूंट रही है तो ऐसे कई बड़े काम करवाने के लिए भी लोग आते होंगे,तो उनके पास कितने पैसो को वसूली की जाती होगी?
अब इसमें कोई शंका नही है कि उच्चअधिकारियों द्वारा वापी नगरपालिक में जांच के आदेश देने चाहिए,क्योंकि जब भ्रष्टाचार को रोकने का प्रयास करने वालों से ही लूंट की जा रही हो तो बड़े-बड़े कामो में कितनी वसूली की जाती होगी?
आम जनता को ऐसी सरकारी कचहरी से सतर्क रहकर काम करना चाहिए,ओर सावधानी बरतनी चाहिए।

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