विश्व प्रसिद्ध कथाकार प्रफुलभाई शुक्ल की 820वीं भागवत कथा गोपाल गौशाला के लाभ के लिए मंगलवार को उमरगाम ठाकोर द्वार पे मंगलमय प्रारंभ हुई

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वैष्णवो के लिए भागवत शास्त्र नहीं है, स्वयं भगवान हैं:- प्रफुलभाई शुक्ल

तपोवन,संजान।विश्व प्रसिद्ध कथाकार प्रफुलभाई शुक्ल की 820वीं भागवत कथा गोपाल गौशाला के लाभ के लिए मंगलवार को उमरगाम ठाकोर द्वार पे मंगलमय प्रारंभ हुई ।इसके पूर्व पहले दिन भागवतजी का दशांश हवन संपन्न हुवा था।वरजागभाई रामाभाई भरवाड तथा उनके परिवार के यहाँ से मंगलमय पोथियात्रा वाजा वजेन्त्र ओर कलशधारी बहनों द्वारा प्रस्थान कर कथा स्थल ले आए । कथा का प्रारंभ दिप प्रागट्य के अवसर पर महंत श्री वीसाभाई हिराभाई भगत,कथाकार हार्दिकभाई शुकल, गणेशभाई बारी, गौरवभाई कॉन्ट्रेक्टर, वैभवी मह्यावंशी, वर्षाबहन सुर्वे,स्वीटी यतिन भंडारी(नारगोल सरपंच) की उपस्थिति में दीप प्रागट्य हुआ।
मंगलाचरण करते हुए कथाकार प्रफुलभाई शुक्ल ने व्यासपीठ से कहा, ‘वैष्णवो के लिए भागवत कोई शास्त्र नहीं है, स्वयं भगवान है। कलियुग का कल्पवृक्ष भागवत है, भगवान का साहित्यिक रूप भागवत है।
कथा में आज कॉरपोरेट श्री राजाभाई भरवाड़, जालाभाई भरवाड़, रामाभाई भरवाड़ उपस्थित थे जिनका स्वागत अमिता बहन काजरेकर, जिगनाबहन जिल्का, पुष्पाबहन पटेल ने किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा में उपस्थित रहे थे। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 2 से 5 बजे तक रखा गया है।

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