
तपोवन,संजान:गुजरात-महाराष्ट्र राज्य की हद को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था,गुजरात के वलसाड जिला में उमरगॉव तालुका जो एक समय महाराष्ट्र में हुवा करता था,पर गुजरात-महाराष्ट्र राज्य के विभाजन के वक़्त उमरगॉव तालुका गुजरात राज्य की हद में लिया गया था,
वही इतने सालों बाद आज महाराष्ट्र के अधिकारीयो ने सरहद मापते हुए सोलसुम्बा गॉव के सरहद का आधा कि.मी.का हिस्सा महाराष्ट्र में लेते हुए मार्किंग की है
यह विवाद कोरोना काल के वक़्त शुरू हुआ था,क्योंकि कोरोना काल में महाराष्ट्र से गुजरात राज्य में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था,जिसके कारण गुजरात-महाराष्ट्र राज्य के बॉर्डर पर रहने वालों को बहोत ही परेशानी का सामना करना पड़ा था।
सूत्रों ले अनुसार पता चला है कि जहाँ से महाराष्ट्र के अधिकारियों ने मार्किंग की है वहाँ पर पहले एक महाराष्ट्र राज्य की हद के तौर पर एक बड़ा पत्थर रखा हुआ था,पर कुछ साल पहले उस पत्थर को वहाँ से हटा दिया गया था,ओर गुजरात राज्य की सीमा को बढ़ाया गया था।
गुजरात-महाराष्ट्र राज्य विभाजन के वक़्त वलसाड जिला का टोपो ग्राफ तत्कालीन थाना जिला की कचहरी में पड़े-पड़े धूल-मिट्टी खा रहा था,वलसाड जिला प्रशासन ने टोपो ग्राफी नक्शा लाने में आलस की?
अब मुद्दे की बात तो यह है कि सोलसुम्बा का आधा कि.मी. का हिस्सा महाराष्ट्र में चला जाता है तो जो लोग बॉर्डर पर रहते है उनका क्या होगा?
अब सोचने वाली बात तो यह है कि अगर यह आधा कि.मी. का हिस्सा महाराष्ट्र का है तो इस जगह की बिल्डिंगो की परमिशन वलसाड टाऊन प्लानिंग कचहरी ने किस आधार पर दी?और अब इसका जिम्मेदार कौन होगा?
इस आधा कि.मी. के दायरे में आई हुई बिल्डिंगों के मकान मालिक अब क्या करेंगे?
वलसाड टाउन प्लानिंग के अधिकारियों पर कार्यवाही की जाएगी या नहीं?





