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आदिवासी समाज समरस ग्रा.पं.मोटी ढोल डूंगरी गॉव के ग्रामजनों ने ग्राम सभा में अनोखा ठराव पास किया,पहली बार किसी गॉव में ऐसे ठराव को मंजूरी दी गयी

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तपोवन,मिंटू जैस्वाल :भारतीय संविधान की पांचवी अनुसूचित आदिजाति विस्तार ग्रा.पं.ढोल डूंगरी गॉव में समरस गॉव की पंचायत और ग्रामजनों द्वारा पारंपरिक ग्राम सभा का आयोजन किया गया,और एक ठराव की मंजूरी दी गयी.इसका अहेवाल कुछ इस तरह से बनाया गया हे.
आदिवासी विस्तार के जल,जंगल और जमीन के मालिक आदिवासी रहेंगे और उसपर आदिवासी प्रजा का शासन होगा.
अनुच्छेद 13 (क) -रूढ़िगत ग्राम सभा का प्रभाव और ग्राम सभा के कानून और निर्णय लागु किये जायेंगे,आदिजाति विस्तार में सामान्य कानून लागु नहीं किये जायेंगे.
अनुच्छेद (5) (6)-अधिसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा की इजाजत के बिना गैरआदिजाती नहीं जा सकेंगे.
वेदांत जजमेंट -अधिसूचित आदिजाति विस्तार में ग्राम सभा की इजाजत के बिना खनन नहीं किया जायेगा,क्योंकि खानो पर आदिवासियों का हक़ हे.
समता जजमेंट-अधिसूचित आदिजाति क्षेत्र में गैरआदिवासी आदिवासियों की जमींन नहीं खरीद सकेंगे.
अनुच्छेद 244(1)-अधिसूचित क्षेत्र में प्रशासक और नियंत्रक आदिवासी होंगे.
अनुच्छेद 243(ब)-अधिसूचित क्षेत्र में नगरपालिका और नगरनिगम असंविधानिक हे.
अनुच्छेद 244(1)पेरा 2-अधिसूचित आदिवासी क्षेत्र में स्थानिक नौकरी में आदिवासी संख्या 100% अनामत रहेगी.
अनुच्छेद 2441(1)पेरा 2-इस अनुच्छेद का पालन नहीं करने वाले को देशद्रोही माना जायेगा.
अनुच्छेद हिंदी अधिनियम 1955-इस अधिनियम के अनुसार आदिवासी रीतिरिवाज अन्य धर्मो से अलग हे,इसलिए आदिवासी हिन्दू नहीं हे.इसका मतलब यह हे की आदिजाति क्षेत्रों में अब जमीन के मालिक आदिवासी ही होंगे.उनके क्षेत्र के राजा अब उनकी प्रजा ही होगी और बाहरी प्रजा इसका विरोध नहीं कर सकेगी.किसी गॉव में पहली बार ऐसे ठराव को मंजूरी दी गयी.

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