देश की जीवन रेखा माने जाने वाले दिल्ली-मुंबई नेशनल हाइवे-48 पर पिछले एक साल से एक मुख्य सड़क खस्ताहाल होकर बंद पड़ी है, जिससे आम जनता, वाहन चालकों और व्यवसायियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सड़क पर गहरे गड्ढे, टूटी हुई पक्की सतह और जगह-जगह कीचड़ व जलभराव ने इसे एक “हाइवे” कम और “खतरे का रास्ता” ज़्यादा बना दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद एनएचएआई और संबंधित प्रशासन कान में तेल डालकर बैठे हैं। रोज़ाना हजारों वाहन इस रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन दुर्घटना का खतरा और ट्रैफिक जाम अब यहाँ आम बात हो गई है।
एक ट्रक चालक ने बताया – “हम रोज़ इसी रास्ते से निकलते हैं, लेकिन अब लगता है कि जान हथेली पर लेकर चलना पड़ता है। सड़क के हालात देख कर ऐसा नहीं लगता कि ये किसी राष्ट्रीय राजमार्ग का हिस्सा है।”
व्यापारियों का भी कहना है कि इस बंद सड़क और खराब हालात के चलते लॉजिस्टिक्स में देरी,डीज़ल की बर्बादी और ग्राहक कम होने जैसी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
जनता अब पूछ रही है कि जब राष्ट्रीय राजमार्ग की हालत ऐसी हो सकती है, तो बाकी सड़कों की क्या उम्मीद की जाए?क्योंकि यह हाइवे महाराष्ट्र और गुजरात को जोड़ने का मुख्य द्वारा हे एवं मुंबई-अहमदाबाद के लिए यह हाइवे बहुत ही बिजी रूट माना जाता है,सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा,लेकिन यह बहुत ही शर्म की बात हे कि आम जनता सरकार को इतना टैक्स देती हे फिर भी उन्हें सरकार या एनएचएआई के अधिकारी सुविधा नहीं दे पा रहे हैं,
नए हाइवे या नई सड़कों का निर्माण करके क्या मतलब होगा जब सरकार पहले से बने हुए रोड को ही मेंटेन नहीं कर पा रही हे,
क्या सरकार और एनएचएआई तब जागेगी जब कोई बड़ा हादसा हो जाएगा?





