डिजिटल भारत के उमरगांव तालुका के मामलतदार की तस्वीर देख कर भारत देश को डिजिटल कहने के लिए सोचना पड़ेगा….

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उमरगांव तालुका के मामलतदार ऑफिस में लोगों की भीड़ देखकर पता चलता है कि मामलतदार के सरकारी कर्मचारीयो के काम करने की स्पीड क्या होगी?
हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मीडिया पर डिजिटल भारत के नारे लगाने से थकते नहीं,पर उमरगांव तालुका के मामलतदार कचहरी के हालात देखने के बाद शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भारत देश को डिजिटल कहने के लिए सोचना पड़ेगा।
उमरगांव तालुका के मामलतदार कचहरी में राशन कार्ड बनवाने के लिए लंबी कतारें लगती है,उमरगांव तालुका के मामलतदार कचहरी में नाही किसी के बैठने की सुविधा है ना ही खड़े रहने के लिए धूप से बचने के लिए कोई छत बनाई गई है,लोग लाइन में घंटों तक खड़े रहते है,बारिश के मौसम में कचहरी में पानी भर जाता है और इस पानी में लोग लाइन में खड़े रहते हैं लोगों की ऐसी स्थिति देखने के बावजूद मामलतदार के कर्मचारी टस के मस नहीं होते और कछुए की स्पीड में धीरे-धीरे अपना काम करते रहते हैं।
एक छोटा सा भी काम लेकर मामलतदार कचहरी में कोई इंसान अगर जाए तो एक बार में तो वह काम नहीं होता कम से कम दो-तीन धक्के खाने पड़ते हैं, सोचने की बात तो यह है की जनता के दिए हुए टैक्स से सरकारी कर्मचारियों को वेतन मिलता है और वही जनता को सरकारी कर्मचारी घंटों लाइन में खड़े रखते हैं, सभी कर्मचारी अपने मन मुताबिक आराम से कुर्सी पर बैठकर कछुए की स्पीड में काम करते हैं बाहर लाइन में खड़े लोग भले ही धूप में खड़े हो या फिर बरसात में किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
उमरगांव तालुका के विधायक श्री रमनभाई पाटकर को भी लोगों की समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है, आज के महंगाई वाले दौर में अगर लोग एक छोटे से काम के लिए दो-तीन धक्के खाएंगे तो लोगों के घर बार कैसे चलेगा?
उमरगांव तालुका के मामलतदार कचहरी में लोगों को पानी में खड़ा होते देखना काफी शर्म जनक बात है

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