1 मई, अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस के शुभ अवसर पर गुजरात राज्य कामदार सेवा संघ के अध्यक्ष श्री आर. ऐम. प्रजापति ने देश- प्रदेश- विश्व के सभी श्रमिकों- मजदूरो- मेहनतकशों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए बताया की – मजदूरों और पूंजीवाद के बीच एक दिलचस्प संबंध होता है। पूंजीवाद का मूल्यवाद धन और संपत्ति पर है जबकि मजदूरों का मूल्यवाद मानवता, अधिकार और समानता पर है।पूंजीवाद में, उत्पादन के लिए मजदूरों को भुगतान किया जाता है जो कि उत्पादक कंपनियों द्वारा निर्धारित शर्तों पर काम करते हैं। मजदूरों को अपनी मजदूरी मिलती है लेकिन वे उन्नत अधिकारों का वास्तविक लाभ नहीं उठा पाते जो वे मांगते हैं। पूंजीवाद में, कंपनियां लाभ कमाने के लिए मजदूरों की न्यूनतम वेतन देती हैं जो उनके बेहतर जीवन की आशाओं को पूरा नहीं कर सकते हैं। मजदूर शब्द कामगारों या श्रमिकों को संदर्भित करता है। मजदूर वह व्यक्ति होता है जो मनुष्य श्रम के आधार पर अपना रोजगार करता है। मजदूर अपने मानवाधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई करता है जैसे कि अधिक वेतन, बेहतर काम की शर्तें, सुरक्षित काम करने के लिए।मजदूरों को अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए अकेले या संगठित होकर एकत्र होने की जरूरत होती है, और कई देशों में मजदूरों के लिए कुछ ऐसे संगठन होते हैं जो उनके हितों की रक्षा करते हैं। इन संगठनों में कुछ शामिल होते हैं जैसे कि व्यवसायियों या सरकार से लड़ने के लिए मजदूरों की शक्ति को एकीकृत करने वाले मजदूर संघ, जोड़बंदी या मजदूर संघर्ष संघ मजदूरों का हित उन्हें न्यायपूर्ण वेतन और बेहतर जीवन सुविधाएं प्रदान करने से होता है। वे समाज के सबसे असली और आवश्यक अंग होते हैं जो रोजगार के लिए तत्पर होते हैं। प्रजापति ने बताया की कुछ महत्वपूर्ण कदम निम्नलिखित हो सकते हैं जैसे कि- उचित वेतन, सुरक्षा, शिक्षा इत्यादि मजदूरों को उनके काम के अनुसार उचित तौर पर मिलना चाहिए। और मजदूरों को संस्थान में उनके काम के प्रति निष्ठा, वफ़ादारी रखनी चाहिए। संस्थान के उत्थान के लिए कम करना चहिये। और अपने हक्क की माँग करनी चाहिये।







