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सरीगाम-भिलाड के समीप श्री निलकंठ महादेव मंदिर में 22 नवंबर से 28 नवंबर तक चलने वाली सात दिवसीय शिवकथा धार्मिक आयोजन संपन्न हो गई

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तपोवन, संजान : उमरगांव तहसील अंतर्गत की सरीगाम-भिलाड के समीप श्री निलकंठ महादेव मंदिर में 22 नवंबर से 28 नवंबर तक चलने वाली सात दिवसीय शिवकथा धार्मिक आयोजन संपन्न हो गई–कथा के समापन के दिनमे हवन पूजन के बादमे हुवा विशाल महाप्रसाद एंव भंडारे का भव्य आयोजन–भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहले हवन पूजन में आहुति डाली और फिर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य कमाया। कथा वाचक पवित्रभूमि से पधारे हुये परमपूज्य श्री महंत जयानन्द सरस्वती महाराज जी ने 7 दिन तक चली कथा में भक्तों को शिवकथा की महिमा बताई।
वहीं कथामे कथावाचक महंत जयानन्द सरस्वती महाराज जी ने लोगों से भक्ति मार्ग से जुड़ने और सत्कर्म करने को कहा और उन्होंने यह भी कहा कि दान, समर्पण के साथ मुक्ति में भक्ति का समावेश जरूरी और हवन-यज्ञ से वातावरण व वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। साथ ही व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। भगवान शिवकथा से जीव में भक्ति, ज्ञान व वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि महादेव अविनाशी, निराकार स्वरूप हैं। वे हमेशा भक्तों पर दया करते हैं। जो भी श्रद्धालु पवित्र मन से आस्था के साथ शिव महापुराण का पूजन करते हैं, उन्हें निश्चित तौर पर शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। फिर उन्होंने यह भी कहा कि शिवकथा केवल पितरों का उद्धार करती है, जबकि भगवान शिव की कथा तो सात पीढ़ी के पूर्वजों का उद्धार करती है। शिव कथा के माध्यम से बताया कि कथा सुनने व श्रवण करने से ज्ञान व सीख तो मिलती है, वहीं जीवन भी सार्थक हो जाती है। शिव पुराण कथा में उल्लेख है कि यदि कोई प्राणी यदि 10 मिनट भी कथा स्थल में पहुंच कर कथा श्रवण कर ले तो उसके तमाम पाप कट जाता है और वे दोषमुक्त हो जाते हैं। शिव महापुराण की कथा को यदि आपने जीवन में उतार लिया तो आपके जीवन में सदैव सफलता प्राप्त होगी। हालांकि आज आधुनिकता के चकाचौंध के चलते लोग भगवान को भूलने लगे हैं, इसलिए ऐसे लोग दुखी हैं। जीवन में सच्चा सुख पाना है तो भगवान की आराधना एवं भक्ति करें!!
इस सात दिवसीय शिवकथा सत्संग का आयोजन नीलकंठ चेरीटेवल ट्रस्ट के ट्रस्टियों मे से- रविन्द्रभाई कोलते,दिलीपभाई पाटील,सुभाषभाई मिस्त्री,मनसुखभाई फुलधरा,विश्वास सीतुत,दिलीपभाई विश्वास,जयेशभाई खांट,रामअवतार निर्वाण,विक्रांतभाई आरेकर,धनंजय आरेकर तथा कई अन्य कार्यकर्ता बन्धु जैसे-डाक्टर विशाल पटेल एवं सैकड़ों कार्यकर्ता बन्धु द्वारा सफल आयोजन हुवा !! यह श्री नीलकंठ महादेव मंदिर गुजरात के वलसाड जिले की उमरगांव तहसील की सरीगांव-भिलाड अंतर्गत स्थित है | इस मंदिर की स्थापना सन- 2012 डिसेम्बर को की गई थी जिसकी वर्ष गाँठ प्रति वर्ष मनाई जाती है | इस वर्ष की यह 10वीं वर्षगाँठ है |पूजनो-परान्त श्री नीलकंठ महादेव मंदिर के प्रांगण में हर बर्ष के भाँती इस बार भी
महादेव शंकर जी की पुजा अर्चना के साथ- साथ वाषिर्कोत्सव मे एकादश सहस्त्र एवं रुद्र पूजन तथा विशाल भंडारे एंव महाप्रसाद का भव्य आयोजन किया गया था– जिससे आस-पास का जन सैलाब एकत्रित होकर भोजन प्रसाद ग्रहण किये | इस मंदिर के वर्तमान कार्यकारी एवं ट्रस्टीवो मे और आज के यह 10वाँ वाषिर्कोत्सव महाप्रसाद कार्यक्रम में
निलकंठ महादेव मंदिर के सम्पुर्ण सदस्य लोग ने अपनी अपनी भागीदारी निभाते हुये इस वाषिर्क महोत्सव को सफलता के पायदान पर पहुँचाया | इस पुन्य अवसर पर भिलाड-सरीगाम एंव इस के आसपास क्षेत्रके भगवान महादेव शंकर के कयौ श्रद्धालु भक्क्तोजनो को बडी मात्रा मे उपस्थित थे | इस मंदिर के परिसर क्षेत्र मे भक्क्तालु एंव श्रद्धालु के इतनी भीड थि आने-जाने लिए वार-पार नहि था !
भक्तों ने जय शिव शंकर , ऊं नम शिवाय, श्री शिवाय नमस्तुभ्यं के जयकारे लगाकर मां पार्वती और शिवजी बने पात्रों का फूलों की बारिश कर एंव शंख ध्‍वनि और हर हर महादेव मंत्रोच्‍चार से गूंजा परिसर…..!!

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