

तपोवन, संजान : सूरत नगर निगम में आम आदमी पार्टी के मुख्य विपक्षी नेता धर्मेश भंडेरी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि, सूरत नगर निगम में भाजपा शासकों द्वारा अंधाधुंध खर्च किया जा रहा है और सबसे गंभीर बात यह है कि वे खर्च की जानकारी देने को तैयार नहीं हैं। धारा क्रमांक 73 डी के तहत जोनल प्रमुख के लिए पहले 15 लाख रुपये खर्च की सीमा थी जो अब 2 लाख रुपये है। इस धारा के तहत उसे किसी भी कार्य को स्वीकृत करने की शक्ति प्राप्त है । दरअसल, यह धारा इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए बनाया गया था, लेकिन इस काम की जानकारी, इसका निरीक्षण किसने किया, उसकी जानकारी समिति के सदस्यों को नहीं दिया गया है। उदाहरण के लिए, भाजपा के शासकों ने पुलों की धुलाई पर 22 लाख रुपये खर्च किए हैं। उन लोगों का कहना है कि 22 लाख रुपए विभिन्न पुलों की धुलाई में खर्च किए गए हैं। लेकिन वे कौन से पुल है उसके खर्च के बारे में पर्याप्त जानकारी देने को तैयार नहीं हैं। उन लोगों ने ‘अलग-अलग पुल’ कहकर ही सारी जानकारी छिपा दी। अधिकारियों के कंधों पर बंदूक लगाकर अपने दोस्तों को भाजपा के शासक लाभ दे रहे है, हुआ,ये काम कब हुआ, किसके निरिक्षण में हुआ, इसका कोई प्रमाण भाजपा के शासकों के पास नहीं है। जैसे पुल की धुलाई की तस्वीरें होनी चाहिए, किस अधिकारी की निगरानी में ने पुल की धुलाई हुई उसकी जानकारी होनी चाहिए, लेकिन भ्रष्ट भाजपा शासक ऐसी कोई जानकारी नहीं देना चाहते हैं।इसके अलावा नगर पालिका के विभिन्न भवन के रखरखाव पर कितना खर्च हुआ है, इसकी जानकारी भी इसी तरह छिपाई गई है। पहले यह था कि जोनल चीफ के पास 15 लाख खर्च करने का पावर था। वह बिना किसी से पूछे धारा 73 डी के तहत 15 लाख रुपये खर्च कर सकते थे। और अगर वे 15 लाख से ज्यादा खर्च करना चाहते हैं, तो उन्हें अनुमति लेनी होगी। इसलिए उन्होंने जोन को सब जोन में तब्दील कर दिया। फिर इन सब जोन को बनाकर उसमे 15 लाख रुपए खर्च किए जा रहे है। फ़िलहाल यह सत्ता महानगरपालिका कमिश्नर के पास है, तो वह अपनी सत्ता का दुरूपयोग करके 15 लाख रुपये की सीमा के भीतर वे दिखा देते है कि उन्होंने सड़क फुटपाथ, बीआरटीएस रेलिंग, डिवाइडर रेलिंग आदि की मरम्मत और रंग भरने का काम किया है। लेकिन हमारा कहना है कि किन सड़कों की धुलाई की गई, किन फुटपाथ या डिवाइडर की रेलिंग की मरम्मत की गई और रंग-रोगन किया गया, इसकी जानकारी किसी सबूत के साथ नहीं दी गई है। तो ऐसे 1 करोड़ 5 लाख रुपए खर्च किए गए हैं लेकिन किसी सबूत के साथ कोई जानकारी नहीं दी गई है।एक और गंभीर बात यह है कि चार साल पहले किए गए कार्यों को अब मंजूरी दी जा रही है। 2018, 2019 और 2020 के कार्य अब स्वीकृत किये गए हैं। लेकिन अब क्यों? इन कार्यों को अब तक स्वीकृत क्यों नहीं किया गया? जब हमने इस बारे में पूछा तो एक अधिकारी ने कहा कि जिस काम को अभी मंजूरी मिल रही है, वह ऑडिट में रुका हुआ होगा इसलिए अब मंजूरी मिली होगी। हमारा एक ही सवाल है कि उस समय जो काम रुके थे, जिन कारणों से रुके हुए थे, उन्हें अब मंजूरी कैसे मिली? अगर उस समय कोई कागजात गायब थे, तो उसे उस वक्त जमा क्यों नहीं किए गए थे?73 डी के तहत नेताओं के स्वागत पर करोड़ों खर्च कर देते है लेकिन पी.आई.सी.यू. में बंद एसी की मरम्मत नहीं कर सकते, जिससे दो माह में 15 बच्चों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।इन सब से स्पष्ट है कि भाजपा के शासक अपने-अपने तरीके से विभिन्न धाराओं का प्रयोग कर घोटाले कर रहे हैं और पर्याप्त जानकारी देने को तैयार नहीं हैं। हमारी मांग है कि जनता के पैसे से किए गए कार्यों की पूरी जानकारी जनता के सामने रखी जाए और जहां कहीं भी घोटालों का मामला हुआ है उसकी निष्पक्ष जांच हो और अगर ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले समय में पूरे सूरत में आम आदमी पार्टी की ओर से जनता को इस मुद्दे की जानकारी देकर एक आंदोलन शुरू किया जाएगा।




