मराठा संस्कृति से ओत-प्रोत हुई सिलवासा शहर की सड़कें
तपोवन,सिलवासा। भारत में जब भी कभी विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ बड़े योद्धाओं का नाम लिया जाता है तो उसमें सबसे पहले हिंदुत्व गौरव गाथा के नायक श्री छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम पहले आता है। मध्यकालीन युग में शिवाजी महाराज ने जिस तरह से विदेशी शासकों के खिलाफ भारत के बड़े भूभाग को न सिर्फ आजाद कराया बल्कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आरजकता के दौर को भी पूर्ण रूप से खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए उनकी जयंती पर आज भी इस महान योद्धा को याद करने के लिए लाखों लोग प्रतिवर्ष मराठा योद्धाओं के वेशभूषा में बैंड बाजे के साथ देश के सभी राज्यों की सड़कों पर नजर आते हैं और अपने संस्कृति और सम्मान को बचाने के लिए बड़े ही सम्मान के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती धूमधाम से मनाते हैं। इसी प्रकार संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती उत्सव समिति द्वारा वीर शिवाजी महाराज की 392वी जयंती उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस शुभ अवसर पर समिति की ओर से सिलवासा शहर में भव्य महा मिरवणूक और शोभायात्रा का आयोजन किया गया था। इस भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ सिलवासा नगरपालिका अध्यक्ष राकेशसिंह चौहाण एवं उपाध्यक्ष अजयभाई देसाई और शिक्षा निदेशक नीलेश गुरव के हाथों श्रीफल तोड़कर किया गया। इस दौरान सिलवासा नगरपालिका के अध्यक्ष राकेशसिंह चौहान, उपाध्यक्ष अजयभाई देसाई , मनीष देसाई, अल्ताफ खुटलीवाला, शातूभाई पुजारी, ललितभाई पटेल, आशीषभाई ठक्कर, संजयभाई राउत, सहित सिलवासा नगरपालिका के चुने हुए जनप्रतिनिधि खास तौर पर उपस्थित रहे थे। इस शोभायात्रा का जुलूस छत्रपति शिवाजी चौक आमली से निकलकर सिलवासा के मुख्य मार्गो से होते हुए नरौली चार रास्ता से निकलकर किलवणी नाका से झंडा चौक होते हुए फिर से छत्रपति शिवाजी राजे चौक आमली पर शोभायात्रा का समापन किया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती उत्सव समिति के। इतने बड़े भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजक समिति के अध्यक्ष उदयभाई सोनावणे, सुनीलभाई महाजन, सुनीलभाई पाटिल, सोमनाथ पाटील,प्रवीण सोनावने,मंगेश सपकाल, दुर्योधन पाटील, गोविंद पाटिल सहित अनेकों कार्यकर्ताओं का ख़ास सहयोग रहा। ज्ञात हो कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 में शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। इस दौरान देशभर में उनकी 392वी जन्म जयंती उत्सव मनाई जा रही है। छत्रपति शिवाजी महाराज के पिता शाहजी भोंसले सेना में सेनापति थे। उनकी माता जीजाबाई धार्मिक स्वभाव वाली थी। बचपन से ही शिवाजी का पालन पोषण धार्मिक ग्रंथ सुनते सुनते हुए था जिसके कारण उनके अंदर बचपन से ही शासक वर्ग की क्रूर नीतियों के खिलाफ लड़ने की ज्वाला जाग उठी थी। इसलिए आज भी वीर शिवाजी महाराज के राज्यकाल को एक आदर्श राज्य के रूप में जाना जाता है।






