
तपोवन, संजान:जहाँ संजान गाँव को पर्यटन स्थल बनाने की बात चल रही है,वहीँ ट्रैफिक की समस्या से संजान गाँव के लोग लगातार जूझते हुए नजर आ रहे है.
अब ऐसे में संजान रेलवे स्टेशन जाना हो या मार्केट,ऐसा लगता है कि मानो नाको तले लोहे के चने चबाना जैसा प्रतीत होता है.
तो क्या इस ट्रैफिक की समस्या का कुछ समाधान होगा?या ऐसे ही आगे भी इस समस्या से जूझना पड़ेगा?
पिछले कई सालों से ट्रैफिक की समस्या से लोग परेशान है,जबकि लगातार वलसाड़ जिला कलेक्टर संजान गाँव को ऐतिहासिक गाँव बनाने के लिए संजान दौरा कर रही है,तो क्या अब इस समस्या का हल होगा?
संजान रेलवे स्टेशन पर लोखंड का कंपाउंड बना दिया गया है,पहले से ही संजान रेलवे ट्रैफिक की समस्या से सुर्खियों में चल रहा था,तो अब यह नया कंपाउंड बनाकर संजान रेलवे स्टेशन का विकास होगा या फिर यात्रियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा.क्योंकि अबतक समझ नही आया कि ऐसा क्या मसला है जो रेलवे स्टेशन पर लोखंड के कंपाउंड बनाने पड रहे है?
संजान गाँव वासियो में तो यह भी चर्चा फैल रही है कि गाँव को पर्यटन स्थल बनाने से पहले जो लोगो को समस्याएं हो रही है उसका हल निकालना चाहिए.
दूसरी और हम बात करते है रेलवे स्टेशन ब्रिज की तो मानो ऐसा लगता है कि माउंट एवरेस्ट का पहाड़ चढ़ने जा रहे है,इतना ऊंचा ब्रिज बनाने से बुज़ुर्गो को कितनी कठिनाईयो का सामना करना पड रहा है ये भला किसको पता है.
वलसाड़ जिला तथा उमरगांव तालुका के उच्च-अधिकारियों को ट्रैफिक की समस्या से परेशान हो रहे लोगो के लिए कुछ करना तो होगा,क्योंकि भारत देश लोकशाही देश है,ऐसे में अगर आम जनता को परेशानी उठानी पड़ रही है तो लोकशाही का कोई मतलब नही।



