जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने हिंडेनबर्ग-अडानी मामले में मीडिया को कवरेज करने की छूट दी है,वहीँ संजान गाँव का विकास करने आए सचिव की बैठक में मीडिया को वलसाड कलेक्टर द्वारा दूर रहने का फरमान दिया गया,आखिर क्यों?

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तपोवन, संजान : उमरगांव तालुका में आये हुए संजान गाँव को ऐतिहासिक तथा पर्यटन स्थल बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा मुहिम चलाई जा रही है,उसी सिलसिले में वलसाड जिला कलेक्टर ने पहले भी संजान गाँव में पारसी स्तम्भ का जायजा लिया था आज फिर से वही पारसी स्तम्भ पर केंद्र सरकार के माइनॉरिटी सचिव मुखमित भाटिया ने जायजा लिया और बैठक रखी.
संजान गाँव के बाजार में प्रवेश करते ही सचिव मुखमित भाटिया ने बाजार के हालात एवं रोड की दशा देखते हुए वलसाड जिला कलेक्टर तथा प्रान्त अधिकारी को खरीखोटी सुनाई.
माइनॉरिटी सचिव मुखमित भाटिया ने कड़क शब्दो मे अलोचना करते हुए कहा कि गुजरात तो विकसित राज्य है फिर भी यहाँ कि हालत गंभीर दिखाई दे रही है,जबकि गुजरात तो गुड़ गवर्नेंस राज्य है.
अब बात करते है संजान गाँव के विकास की तो पहले भी कीर्ति स्तंभ के लिए माइनॉरिटी फण्ड में से रोड को गौरव पंथ बनाने के लिए संजान गाँव को मुआवजा दिया गया था,मगर यहाँ के स्थानिक नेताओं ने विकास के नाम पर सिर्फ और सिर्फ ललियावाडी दिखाई,दूसरी और बात करते है आज के बैठक की तो कलेक्टर द्वारा मीडिया को दूर रहने का फरमान सुना दिया गया तथा अधिकारियों के साथ बैठक की गई और स्थानिक लोगो को भी इस बैठक से दूर रखा गया.
संजान गाँव का विकास करना है तो स्थानिक लोगो को भी साथ मे लेकर चलना होगा इस तरह मीडिया को भी दूर रखकर गुप्त मीटिंग ली जाएगी तो गाँव का विकास होगा या नही ये लोगो को कैसे पता चलेगा?
अब क्या स्थानिक लोगो से ज्यादा अधिकारियों को गाँव के बारे में ज्यादा मालुमात है?
यहाँ तक कि कुछ स्थानिक नेताओं को भी इस बैठक से दूर रखा गया,कलेक्टर के इस रवैये से संजान गाँव के लोगो को क्या नुकसान का सामना करना लड़ सकता है?
अब बात करते है संजान गाँव के एक वेपारी कि तो पहले भी कलेक्टर की अपीलेट एवं स्वयं सत्ता के सामने भी सवाल है,हाल ही में आये सचिव ने कही जानेवाली गुजरात गुड़ गवर्नेंस के सामने सचिव श्री ने वलसाड जिला कलेक्टर को संजान गाँव के विकास की नीति को लेकर प्रश्न खड़ा किया।

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