गुजरात-महाराष्ट्र की सरहद को लेकर फिर एक बार सोलसुम्बा गॉव में खड़ा हुआ विवाद,गुजरात के अधिकारियों ने महाराष्ट्र के अधिकारियों को सर्वे करने से रोका….

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तपोवन, संजान :पिछले कई दिनों से गुजरात और महाराष्ट्र की सरहद को लेकर विवाद चल रहा है,इसी दौरान तलासरी तालुका का DSLR का पत्र उमरगॉव के तहसीलदार को प्राप्त हुआ,उसमे स्पष्ट तौर पर लिखा गया था कि 25 मई को महाराष्ट्र के सर्वेयर सोलसुम्बा गॉव में सर्वे करेंगे और नई सरहद का माप लेंगे।
जैसे ही यह पत्र अधिकारियों को प्राप्त हुआ तो उमरगॉव तालुका में सनसनी फैल गई,क्योंकि पहले भी महाराष्ट्र के कुछ अधिकारियों ने सरहद का सर्वे कर महाराष्ट्र की सीमा को गुजरात की हद्द में ले आए थे।
अब ताज्जुब की बात तो यह है कि वहाँ पर स्थित राधिका रेसिडेंसी अपार्टमेंट की जमीन NA प्लाट है,अगर यह सरहद विवादित जमीन है तो NA का आर्डर कहा से प्राप्त हुआ?
गुजरात-महाराष्ट्र विभाजन के वक़्त उमरगॉव को गुजरात मे ले लिया गया था,कुछ महीने पहले महाराष्ट्र के कुछ अधिकारियों ने महाराष्ट्र की हद को लग कर जो सोलसुम्बा गॉव है उसके आधा किलोमीटर अंदर की तरफ मार्किंग करके चले गए थे।
गुजरात-महाराष्ट्र के विभाजन का टोपो ग्राफ अब तक कचहरियों में पड़े-पड़े धूल मिट्टी खा रहा है तो दूसरी तरफ सरहद का विवाद चल रहा है,ऐसे में अधिकारियों को जल्द से जल्द इस मुद्दे पर कोई फैसला लेना होगा।
वही पर सोलसुम्बा गाँव के पूर्व जिला पंचायत प्रमुख मणिलाल पटेल का कहना है कि वह जबरदस्ती महाराष्ट्र के अधिकारियों को उनके गॉव की जमीन को कब्ज़ा नही करने देंगे।
चंद्रकांत विठलदास तन्ना नामक शख्स की जमीन सर्वे के मुताबिक महाराष्ट्र राज्य में आती है,इस मुद्दे पर उनका कहना है कि पिछली बार धाक-धमकी से मार्किंग किया गया था मगर इस बार मार्किंग नही करने देंगे और गुजरात में वह टैक्स भरते है और उन्हें गुजरात मे ही रहना है।
उमरगॉव तालुका के तहसीलदार ने महाराष्ट्र के सर्वेयर से बात की और उन्हें सर्वे करने से मना किया और कहा कि यह राज्य लेवल का मुद्दा है इसलिए हम तालुका और जिला के अधिकारी कुछ नही कर सकते।
इस सिचुएशन को हैंडल करने के लिए गुजरात पुलिस वहाँ मौजूद थी,ताकि कुछ अन-बन ना हो,इस मामले को सुलझाने के लिए उमरगॉव तालुका के तहसीलदार, तालुका पंचायत प्रमुख,तालुका विकास अधिकारी,तालुका पंचायत कारोबारी और पूर्व जिला पंचायत प्रमुख भी मौजूद रहे।
फिलहाल तो यह मामला यहाँ पर स्थगित कर दिया गया है पर आगे इस मामले पर उच्च अधिकारी कुछ अहम फैसले लेंगे या फिर यह विवाद हमेशा की तरह ऐसे ही चलता रहेगा?

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