दमन और दीव के सांसद श्री उमेश पटेल ने आज लोकसभा में कृषि मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान अपने क्षेत्र के किसानों और मछुआरों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से उठाया।

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अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “खेत में अन्न उगाने वाला किसान हो या समुद्र से जीवन निकालने वाला मछुआरा — दोनों इस देश की थाली भरते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से आज दोनों ही अपनी थाली भरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कृषि की परिभाषा केवल खेतों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समुद्री मत्स्य पालन को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए, क्योंकि यह देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

सांसद उमेश पटेल ने दमन और दीव में उत्पन्न गंभीर डीज़ल संकट का मुद्दा उठाते हुए बताया कि हालिया अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते Indian Oil Corporation Limited (IOCL) एवं Reliance Industries Limited (RIL) द्वारा डीज़ल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी कमी और कीमतों में असामान्य वृद्धि देखने को मिल रही है।

उन्होंने कहा कि दमन और दीव का पारंपरिक मछुआरा समुदाय पूरी तरह समुद्री मत्स्य व्यवसाय पर निर्भर है और डीज़ल उनके लिए जीवनरेखा के समान है। वर्तमान स्थिति में अनेक नौकाएँ समुद्र में नहीं जा पा रही हैं, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका संकट में आ गई है।

सांसद ने इस मुद्दे पर तेल कंपनियों के रवैये पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि कठिन समय में उद्योगों को सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उन्होंने सरकार से निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:

  • मछुआरों के लिए डीज़ल की आपूर्ति तत्काल प्रभाव से बहाल की जाए
  • तेल कंपनियों को प्राथमिकता के आधार पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएँ
  • भविष्य में संकट से बचाव हेतु विशेष आपूर्ति तंत्र विकसित किया जाए
  • रियायती अथवा नियंत्रित दर पर डीज़ल उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए
  • मछलीमारी में उपयोग होने वाले डीज़ल को “Essential Livelihood Input” घोषित किया जाए
  • डीज़ल एवं पेट्रोल को कृषि के अंतर्गत लाकर सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जाए
  • बर्फ निर्माण हेतु उपयोग होने वाली बिजली को भी कृषि दरों पर उपलब्ध कराया जाए
  • Dedicated Diesel Supply Mechanism, Subsidized Diesel Scheme एवं Emergency Fuel Supply System लागू किया जाए
  • मछआरो के लिए Fishermen development board के गठन हो.

सांसद उमेश पटेल ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि “कृषि योजनाओं का मूल्यांकन केवल राष्ट्रीय औसत से नहीं, बल्कि सबसे छोटे और कमजोर क्षेत्रों के आधार पर होना चाहिए। दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन-दीव को शामिल किए बिना समावेशी कृषि की कल्पना अधूरी है।”

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि “यदि हमें सच में समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत बनाना है, तो खेत के किसान और समुद्र के मछुआरे — दोनों के पसीने को समान सम्मान देना होगा।”

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