दानह के ग्रामीण और शहरी विस्तारोंं की सड़के बुरी तरह से हुई ध्वस्त:पीडबल्यूडी , सड़क प्राधिकरण और सड़क से जुड़े विभाग के तमाम आला अधिकारी कान में रुई डालकर सो रहे हैंपीडबल्यूडी , सड़क प्राधिकरण और सड़क से जुड़े विभाग के तमाम आला अधिकारी कान में रुई डालकर सो रहे हैं

0
149

सड़क दुरूस्त करवाने के लिए सरपंचों को उद्योगपतियों से लगानी पड़ रही है गुहार

चंदे से रिपेयर होगी सड़क तो सड़को के नाम पर आने वाले करोड़ो रू. किसकी जेब में जाएंगे.

सिलवासा: इन दिनो दानह में जमकर बारिश हो रही है. जिस वजह से दानह के शहरी और ग्रामीण विस्तारो की सभी सड़के ध्वस्त हो गई है. इंडस्ट्रियल जोन की सड़को का सबसे बुरा हाल है. वैसे तो दानह की सड़के साल भर ही खराब रहती है बरसात तो एक बहाना है. दरअसल दानह की सभी सड़के बेहद ही कमजोर और घटिया मटेरियल से बनाई गई है. ये सड़के अक्सर उखड़ती रहती है ऊपर से साल भर प्रशासन सड़को को कभी पेयजल, कभी अंडर ग्राउंड बिजली, कभी टेलीफोन, कभी गटर लाईन के लिए खोदता रहता है . प्रशासन के चहेते लोगो को खोदाखादी का काम मिलता रहता है . बिजली, पानी, फोन और गटर समेत कई कामों के टेंडर निकलते रहते है चहेते लोगों को काम मिलता रहता है. इसलिए सड़को के विकास पर कोई ध्यान नहीं देता. कहने तो सिलवासा स्मार्ट सिटी बनने जा रहा है, कई तरह के विकास कार्य हो रहे है, बड़े बड़े विकास हो रहे है. आरो प्लांट, स्टेडियम, पुल, सरकारी इमारत क्या कुछ नहीं बन रहा है.प्रशासन उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाले सभी कार्य करवा रहा है. जिसमें सरकारी अधिकारी जमकर पैसा कमा रहे है. पानी प्लांट और सड़क के रखरखाव के लिए खूब पैसा आता है मगर रखरखाव तो कोई होता नही है फिर ये पैसा जाता किधर है.
हर साल भारत सरकार संघ प्रदेश को विकास के लिए 2500 करोड रु देती है फिर ये सड़के बनती क्यों नहीं है. ये पैसा जाता किधर है.
आज दानह के सभी सड़को की स्थिति खराब है. इंडस्ट्रीज जोन की सड़के बेहद जर्जर है इससे वाहन चालकों को बहुत तकलीफ होती है, यातायत ठप्प होता है, गाड़ी बिगड़ जाती है, दुर्घटनाएं होती है, समय खराब होता है. इसके वाबजूद प्रशासन के आला अधिकारी , पीडबल्यूडी के सचिव, सड़क प्राधिकरण के अधिकारी अब सोए पड़े है, जगाने से भी ये जाग नहीं रहे है.
खरडपाड़ा अथाल समेत सभी विस्तारो की सड़क बेहद बदहाल है. दानह के एक सरपंच दामु भाई ने तो उद्योगपतियों से गुहार लगा रहे है कि सड़के बनवा दो , उनकी देखासिखी अन्य सरपंच भी उद्योगपतियों की ओर आशा भरी निगाह से देख रहे है.इंडस्ट्रीज की सड़के जब उद्योगपतियो की अपनी जेब से ही बनवाना है तो उनसे जमाने भर के टैक्स क्यो लिए जाते है.
आम जनता और सरपंचों ने प्रशासक प्रफुल पटेल से तो उम्मीद छोड़ ही दी है कि वे कोई सड़के बनवाएंगे अब तो जनता को ही चंदा लेकर अपनी सड़के बनवानी पड़ेगी.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here