
तपोवन, संजान:ता.18 फरवरी 2022 के दिन संजान गॉव के कुछ लोगो ने संजान की प्राथमिक स्कूल आदर्श बुनियादी प्राथमिक स्कूल के मैदान पर वॉलीबॉल खेलने की परमिशन मांगी,ताज्जुब वाली बात यह हे की खेलने की परमिशन उनको शिक्षण अधिकारी द्वारा सिर्फ दो घंटो के अंदर मिल गयी.सरकारी अधिकारियो की काम करने की स्पीड को देखकर संजान की जनता में चर्चा फेल रही हे की अब जाती और आवक जैसे मामूली दाखले निकलवाने के लिए उनको 4/5 धक्के नहीं खाने पड़ेंगे,क्योंकी आम जनता को मामूली कागजात निकलवाने के लिए सरकारी बाबुलोग धक्के पे धक्का खिलवाते हे,ऐसे में खेलने की परमिशन 2 घंटे में देना कही सेटिंग डॉट कॉम तो नही…?
पिछले कुछ दिनों से संजान की प्राथमिक स्कूल गेट के अंदर वॉलीबॉल खेला जा रहा था,जिसको लेकर संजान गॉव के कुछ लोगो ने मुख्य शिक्षक (प्रिंसिपल) को शिकायत भी की थी शिकायत करने के बावजूद..प्रिंसिपल ने उनको खेलने दिया,यह बात की जानकारी संजान आउटपोस्ट (पुलिस स्टेशन) को दी गयी और बताया गया की रात को 2 बजे तक यह खेल चलता हे इस बात की चर्चा है…उमरगाम पुलिस द्वारा पिछले दिनों में सख्त कार्यवाही भी की गई थी।
अब चौकाने वाली बात तो यह हे की प्रिंसिपल साहब ही खेलने वालो को बढ़ावा दे रहे हे,उनका कहना हे की स्कूल गेट के अंदर खेल सकते हे।प्रिंसिपल साहब के ऊपर ऐसा कोनसा दबाव हे, जो वह प्रवृति को रोकने में असमर्थ हे और बढ़ावा दे रहे हे,कही वॉलीबॉल खेलने की आड़ में रातको कुछ और ही काम तो नहीं किया जाता…? क्योंकि सरकारी स्कूल एक सरकारी प्रॉपर्टी हे और सरकारी ऑफिस बंद होने के बाद कोई भी नागरिक उस कचहरी में प्रवेश नहीं कर सकता,पर यहाँ तो स्कूल के मुख्य शिक्षक (प्रिंसिपल) साहब ने ही उनको खेलने की इजाजत दे दी हे.
कही किसी राजनितिक पार्टी का उनपर दबाव तो नहीं..?
वॉलीबॉल खेलने की परमिशन जिग्नेश मनहरलाल शाह नामक शख्स ने ली हे
तालुका शिक्षक अधिकारी ने सरकारी स्कूल मैदान में खेलने की इजाजत तो दी हे ,पर सरकारी जमीन को उपयोग में लेने के लिए जो भाड़ा चुकाना पड़ता हे,उसका परमिशन में उल्लेख नहीं किया गया हे, तो क्या अब परमिशन लेने वाले स्कूल को भाड़ा चुकाएंगे…?
अगर चुकाएंगे तो कितना भाड़ा चुकाएंगे…?इसकी जानकारी संजान गॉव वासियो को भी दी जानी चाहिए.
शिक्षण अधिकारी ने कोविद-19 गाइडलाइन को मद्दे नजर रखते हुवे यह परमिशन दी हे, तो क्या अब कोविद-19 गाइडलाइन का पालन खेलते वक़्त किया जायेगा..?
अगर गाइडलाइन का पालन नहीं किया जाता तो क्या उमरगॉव की पुलिस एक्शन मूड में आएगी…?
अगर सरकारी प्रॉपर्टी पर कुछ नुकसान होता हे तो इसका जवाबदार कौन होगा प्रिंसिपल साहब या शिक्षण अधिकारी..?
सरकारी अधिकारी ने जो परमिशन दी हे उसमे कितने दिनों के लिए दी है (समय मर्यादा) उसका भी उल्लेख नहीं किया हे,और जिस मैदान में खेलने की परमिशन ली गयी उसका भाड़ा समय मर्यादा के हिसाब से एडवांस चुकाना पड़ता हे,सूत्रों के अनुसार पता चला हे की ऐसा कोई भी फण्ड स्कूल में अबतक जमा नहीं हुवा हे।
प्रिंसिपल साहब इस खेल को इतना प्रोत्साहन दे रहे हे जैसे की उनका कोई अपना निजी स्वार्थ हो,क्या प्रिंसिपल साहब
संजान गॉव में इस खेल द्वारा लड़ाई झगड़ा करवाना चाहते हे…?आख़िरकार प्रिंसिपल साहब को बच्चो के भविष्य से ज्यादा इस खेल में क्यों इंटरेस्ट आ रहा हे…?
वही संजान के कुछ लोग इस विरोध करने वाली बात को राजनितिक मोड़ दे रहे हे और गलत राह पर ले जाने की कोशिश कर रहे हे ।
जो लोग इसके विरोधी हे उनका विरोध सिर्फ और सिर्फ स्कूल कंपाउंड के अंदर खेलने से हे,क्योंकि स्कूल में जो जरुरी कागजात रखे जाते हे उनके साथ किसी भी प्रकार की छेड़खानी ना हो ।






Very nice news