गुजरात की केसर और हाफुस के आम पर दुनिया की नजर

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भारत देश 4000 सालो से आम के फल के लिए प्रख्यात हे.रामायण और महाभारत में भी आम का उल्लेख किया गया हे.भारत की गर्मियों की मौसम में आम के फल को प्रथम स्थान प्राप्त हे,और फलो का राजा माना जाता हे,ठण्ड के मौसम में सेब का बहोत महत्व हे,पर सेब से ज्यादा महत्व भारत में आम को दिया जाता हे,इसलिए आम भारत देश का राष्ट्रीय फल भी हे. अंतर्राष्टीय बाजार में आम बहोत ही प्रख्यात हे.आम खाना सबको पसंद हे,रंग,स्वाद,आकर और दिखने में सुंदर आम पोषणमूल्य औषधि अब जनता का फल बन गया हे.दूसरे फलो के मुकाबले इसका एक और लाभ हे की दूसरे फल पक जाने के बाद खा सकते हे पर आम को कभी भी खाया जा सकता हे.उसके बाद आम को मूल्यवर्धक बनाकर साल के 12 महीना उसका उपयोग कर सकते हे.सीजन के वक़्त गरीब से लेकर आमिर सभी इस फल को खाते हे.गुजरात में आम की 2 जात केसर और हाफुस की अंतर्राष्ट्रिय बाजार में बहोत मांग हे,दोनों में केसर का प्रथम स्थान हे.इस फल का इतिहास ऐसा बताया गया हे की जूनागढ़ के नवाब के साले साहब ने मांगरोल के बगीचे से केसर आम से भरा टोपला अपने जीजाजी नवाब मोबत खान को भेजा,नवाब को केसर बहोत पसंद आया.तब से यह वृक्ष को साले भाई की आमबाड़ी ऐसा नाम दिया गया.उसके बाद पोरबंदर के विस्तारण कार्यकर (स्व.ढाँकि) आम के मावा का रंग देखकर केसर नाम रखा.भारत सरकार ने 2011 में केसर आम जियोग्राफिकल आईडेन्टिफिकेशन (CGI-जूनागढ़ केसर)के नाम से पहचान दी,केसर आम की बड़ी मात्रा में. माँग होने के कारन इसका निकास होता हे.2019-2020 में ताजा फल 400 करोड़ और आम से 921 करोड़ का निकास हुआ.अमरीका तथा यूरोप ने भारत के इस फल पर बाण रखा,परन्तु स्थानिक प्रजा की मांग के कारन अमरीका में 2007 और यूरोप ने 2011 में इस बाण को वापस लिया.हाफुस आम का इतिहास ऐसा बताया गया हे की अल्फांसो नमक पोर्तुगीज विदेश से फल लेकर आए और उसकी गुटली से इसको बढ़ाया गया,जिसका प्रथम प्लान्टेसन गोवा में हुआ था.गुजरात में इसको हाफुस के नाम से जाना जाता हे.गुजरात में केसर आम मुख्य जूनागढ़ और अमरेली जिला में होता हे,जबकि हाफुस आम वलसाड और नवसारी जिला में ज्यादा होता हे,महाराष्ट्र के देवगढ़ और रत्नागिरी के हाफुस आम की तारीफ की जाती हे.विशेष भारत दुनिया का 49.62% हिस्से में हे,और 40.48% की खेती करते हे दुनिया 111 देशो में आम की खेती की जाती हे.भारत में कुल विस्तार 2.30 लाख हेक्टर हे,जिसमे हर साल 2.05 करोड़ टन आम पकता हे.इसके आलावा आम की खेती को तूफान के कारन बहोत नुकसान होता हे और ज्यादा ठंडी के कारन एक महीना देर से आम के फूल आए,जिसके कारन अब 10-15% फूल आए हे,जो फरवरी के अंत तक फूल आना चालू रहेंगे.इसलिए आम बाजार में देर से आने को शक्यता हे.इस फल के विस्तार और उद्पादकता को बढ़ने के लिए नयी टेक्नोलॉजी का उपयोग करने की जरूरत हे.

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