डहाणू गरबा का नाम सुनते ही हर तरफ चहल-पहल और उत्साह छा जाता है। गानों की धुन पर सब थिरकने लगते हैं और माहौल एकदम जोश से भर जाता है।
एक समय ऐसा था जब डहाणू में गरबा का मतलब पूरे जोश से भरा माहौल होता था, और खुशियों का रंग जम जाता था। वजह भी साफ थी, क्योंकि गरबा के इस दौर में रविया भाई दुबला खुद के लिखे और गाए हुए गीत बजाया करते थे। गरबा की बात छिड़ते ही उनकी यादें आज भी उतनी ही ताजा हो जाती हैं।
डहाणू नगर परिषद की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। वे डहाणू के एक प्रसिद्ध व्यक्तित्व थे।
अमीत महेश पुजारी के दादाजी रविया भाई दुबला गरीबों के मसीहा (सहारा) थे। वे गरीबों के हर सुख-दुख में उनके साथ रहते थे। और गरबा की यही परंपरा आज भी उनके पोते-पोती, पुजारी और दुबला परिवार आगे बढ़ा रहे हैं।




